

वर्षा की ख़ुशी भी, ग़म भी :- शिवानी पाठक

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विजिटर डेस्क !!
शिवानी पाठक
उतरौरा, उत्तराखंड

आज मैंने एक साथ दो तस्वीर देखी,
एक साथ किस्मत की तकदीर देखी.
एक तरफ बादलों को देख कर लोगों की ख़ुशी देखी,
दूसरी तरफ बादलों को देख कर किसी की बेबसी देखी,
बादल तो एक ही है, फिर भावनाएं सबकी अलग क्यों?
व्यक्ति भी एक जैसे फिर कामनाएं सबकी अलग क्यों?
शायद इस क्यों का जवाब भी क्यों में ही है,
इसीलिए तो तक़दीर और तस्वीर सबकी अलग है,
शायद कसूर परिस्थितियों का ही है,
वर्षा की ख़ुशी उनके लिए जिनके घर पक्के हैं,
और बेबसी उनके लिए जिनकी छत कच्ची है,
ख़ुशी उनके लिए जिनका चूल्हा रात में जलेगा,
और बेबसी उनके लिए जिनका चूल्हा पानी में डूबेगा,
बस इतनी बात काफी है इन्हें शब्दों में ढालने के लिए,
यह क्षण काफी हैं इन पंक्तियों को पढ़ने के लिए,
आंखें बंद करो और खुद को रखो उस स्थान पर
फिर फर्क समझ में आये बेबसी और ज्ञान पर.
नोट :- यह सुंदर कविता हमें चरखा फीचर के माध्यम से हमारी पाठक शिवानी पाठक के द्वारा भेजी गई है यदि आप भी ऐसे सुंदर कविता अथवा पहाड़ों के पलायन, बेरोजगारी, स्वरोजगार, सड़क स्वास्थ्य आदि विषयों पर लेख लिखते हैं तो हमारे व्हाट्सएप नम्बर 7500773780 पर अथवा हमारे ईमेल पता:- hillsheadline@gmail.com पर अवश्य भेजें ! हम अपने पोर्टल के माध्यम से आपकी आवाज को उठाने का कार्य करेंगे!




