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अल्मोड़ा जिले में स्थित प्राचीन झांकर सैम देवता मंदिर , नाम लेते ही कई समस्याओं से मिलता है छुटकारा!

Hills Headline

बीरेंद्र सिंह कपकोटी

अल्मोड़ा

उत्तराखंड को ऐसे ही देवभूमि का नाम नहीं दिया गया है। यहाँ पर बने छोटे-बड़े मंदिर,तीर्थ,धाम जाने अनजाने कितनी ही संख्या में पाए जाते हैं। जिनको देखकर या जिनके बारे में सुनकर अथवा पढकर लगता है कि वास्तव में यह भूमि पूर्व में देवताओं की ही भूमि रही होगी . इन्हीं में से आज Hills Headline आपके लिये अल्मोड़ा जनपद के प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिर सैम देवता के बारे संछिप्त जानकारी आपके सम्मुख रखने का प्रयत्न कर रहा है ! उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर झांकर सैम देवता का मंदिर है. यह मंदिर बहुत प्राचीन है .
इस मंदिर की मान्यता भी बहुत अधिक है . यहाँ दूर दराज से भक्त सैम देवता के दर्शन करने के लिये आते हैं . सैम देवता के दरबार भक्त यहाँ संतान प्राप्ति , नौकरी , शादी आदि की मनोकामना पूर्ण हेतु आते हैं . इस मंदिर में स्वयंभू लिंग में झांकर सैम देवता विराजमान है. मान्यताओं के अनुसार, झांकर सैम देवता सभी देवी-देवताओं के गुरु हैं और इनको देवी-देवताओं का मामू भी कहा जाता है. इस मंदिर में हर महीने हजारों की संख्या में श्रद्धालु झांकर सैमई देवता के दर्शन करने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं.
क्षेत्र के निवासी गोविंद सिंह गैंडा ने बताया कि यहां देवदार के पेड़ से कुछ दशकों पहले तक दूध निकला करता था, लेकिन धीरे-धीरे दूध आना बंद हो गया. हालांकि पेड़ के पीछे भगवान गणेश की आकृति आज भी बनी हुई है, जोकि कई वर्षों पुरानी है. वहीं सैम मंदिर में देवी का भी मंदिर है, जो काफी साल पुराना है. भगवान की धुनी भी लगती है और भगवान अवतरित होते हैं, जो भी जागेश्वर धाम आता है, तो वह इस मंदिर में जरूर आता है. माना यह जाता है कि जिनको आर्थिक दिक्कत होती है या फिर संतान न होने से लोगों को काफी समस्या होती है, वे इस दरबार में आकर भगवान से मन्नत मांगते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. जिनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, वे मंदिर में आकर दोबारा पूजा-अर्चना करते हैं, घण्टी या प्रसाद चढ़ाते हैं और भगवान को धन्यवाद देते हैं. यहाँ गांवों से लोग पैदल काफी दूर दूर से यहां जातुरा लेकर जाते है सभी देव ओडांगरों को साथ लेकर रात को वही रूककर देव डांगर नाचते है यहाँ आने के लिये जागेश्वर से लगभग 4-5 किलोमीटर दूरी पहले से ही ऊपर की ओर चढ़ाई की यात्रा तय करनी होगी आप पैदल या गाड़ी दोनों तरीके से जा सकते हैं

NOTE: इस खबर में दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं. Hills Headline किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है. और हाँ Hills Headline देश ,राज्य व क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ ऐसे खबरें आपके सम्मुख रखने का प्रयत्न करते रहता है आपके आसपास भी है तो ऐसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हमें हमारे 7500773780 व्हाट्सएप पर नम्बर पर अवश्य बतायें ! ताकि हम आपके माध्यम से अपने दर्शकों को बता सके!

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