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लावारिस जानवरों का जिम्मेवार कौन ? :- कैप्टन सोबन सिंह भड़

हल्द्वानी

कैप्टन सोबन सिंह भड़ (अ.प्रा.)अध्यक्ष रिवर वैली ने  इसी शीर्षक से मैंने 17 फरवरी को एक लेख लिखा था। इसी क्रम में एक बार फिर…एक बेजुबान, लाचार, भूख मिटाने के लिए जहां हरा भरा खेत, क्यारी या जमीन को तलाशते-तलाशते ना जाने पूरे दिन भर में ये बेजुबान पता नहीं कितनी मार खाते हैं कितनी दुत्कार इन बेजुबानों को हर रोज सहनी पड़ती है। आंखिर इस सब में दोष किसका है प्रशासन का सरकार का, उनका जिनके हाथों ये उनका नुकसान करने के उपरांत सजा पाते हैं या उनका जो इन बेजुबानों का पूरा दोहन करने के उपरांत इनको दर दर की ठोकर खाने  के लिए छोड़ देते हैं। एक तरफ गौवंशी जानवर का वध कानूनी तौर पर अपराध है तो दूसरी तरफ जो भी इंसान इन बेजुबानों को इनका पूरा उपयोग करने के उपरांत इन्हें दर दर, इधर-उधर लोगों की मार खाने और दुत्कार सहने और दर्जनों घाव और उन घावों में पीप और कीड़े पड़ने के बाद अंत में वह इस दुनिया को छोड़ कर चला जाता है उन इंसानों को किस श्रेणी में रखा जाए यह सोचने का विषय है । ऐसी विभत्स मौत सायद ही मैंने कभी देखी हो जो आज कल आम हो गया है।

   इसी क्रम में आज फिर एक बेजुबान ने जुबान वालों की मेहरबानी से पता नहीं कब दम तोड़ दिया पता ही नहीं चला। मुझे मां गिरजा विहार, नरसिंह तल्ला के एक जागरूक सज्जन का फोन आया कि एक गाय उनकी कालोनी के  खाली प्लॉट में मृत पड़ी है उसको वहां से उठवाना है। मुझे सुनकर बहुत दुःख हुआ लेकिन मैं क्या कर सकता था मैंने नगर निगम के एक अधिकारी महोदय से संपर्क किया तो उनका जवाब सकारात्मक था उन्होंने जेसीबी भिजवाकर अंखिरकार उस बेजुबान को दफनाने का काम करवाया। जिसके लिए मैं व्यक्तिगत रूप से नगर निगम का धन्यवाद करता हूं कम से कम इन कामों को प्राथमिकता देने के लिए। ऐसा नहीं कि शासन, प्रशासन, जनता (विशेषकर वो लोग जो इन बेजुबानों को उपयोग करने के बाद लावारिस छोड़ देते हैं) इन सबसे अनभिज्ञ है। यह सभी के संज्ञान में है वह भी तब जब ये बेजुबान शहर से लेकर गांव तक के रोडों में बेतरतीब घूमते नजर आ जाते हैं और हमेशा ये दुर्घटना के कारण बनते हैं या उनके कारण दुर्घटना की पूरी संभावना बनी रहती है। सबको पता है रोडों में राजा भी चलते हैं और रंक भी फिर भी यह सब चल रहा है आए दिन या तो खाली प्लॉट में या फिर रोडों में इन बेजुबानों की मृत काया प्रायः मिल जाती है। यह गंभीर विषय सोचनीय है जबकि सरकार की तरफ से इनका (गौवंशी) बध निषेध है। इस तरह से आए दिन इनके शव लावारिस स्थिति में अक्सर देखने को मिलते हैं। यह एक गंभीर विषय है जिसके बारे में सभी जिम्मेवार पक्षों को गंभीरता से सोचना चाहिए कि इनकी दुर्गति कैसे रोकी जाए।    

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