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उत्तराखण्ड की बेटी किरण नेगी के हत्या के आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी , उत्तराखण्ड में विरोध ,पूर्व सीएम हरदा सहित इन लोगों क्या कहा? जानें 👇🏻👇🏻

देवभूमि उत्तराखण्ड की  19 वर्षीय बेटी  से गैंगरेप और हत्या के दोषियों को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा  सोमवार को बरी कर दिया है . न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दोषियों को दी जाने वाली फांसी की सजा को पलट दिया.इस मामले में निचली अदालत और हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी. बताते चलें न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक  कि यह मामला साल 2012 का है  उत्तराखंड के पौड़ी में रहने वाली 19 साल की युवती के अपहरण के बाद दरिंदगी और हैवानियत का है. आरोपियों लड़की के साथ रेप किया था. इसके बाद उसकी आंखों में तेजाब तक डाल दिया था. उस समय यह घटना एकदम रोंगटे खड़े कर देने वाली थी सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि उस समय उत्तराखंड की बिटिया घरेलू काम के लिये  घर से निकली थी.  वो देर शाम तक घर नहीं लौटी तो परिजन चिंतित हुए. घबराए परिजनों ने उसकी काफी तलाश की। लेकिन कोई सुराग नहीं लगा. बहुत खोजने के बाद इतनी सूचना जरूर मिली कि कुछ लोग एक लड़की को गाड़ी में डालकर दिल्ली से बाहर ले जाते हुए दिखाई दिए हैं. जानकारी मुताबिक इस मामले में दोषियों ने लड़की के साथ रेप के साथ उसे असहनीय यातना भी दी थी. उसके साथ काफी हैवानियत की लड़की को कार में इस्तेमाल होने वाले औजारों से पीटा गया, उसके शरीर को जगह-जगह सिगरेट से दागा गया था और उसके चेहरे को तेजाब से जलाया गया था. इसके बाद अभियुक्त गिरफ्तार किए गए थे. दिल्ली की एक अदालत ने रेप और हत्या के दोषी ठहराए जाने के बाद मौत की सजा सुनाई थी. इस फैसले को सही मनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा पर मुहर लगा दी थी. इसके बाद दोषियों की तरफ से सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गयी थी. सुप्रीम कोर्ट के द्वारा  दोषियों को किया बरी है इस निर्णय के बाद उत्तराखण्ड राज्य में कड़ा विरोध हो रहा है ! कोई सरकार को कोस रहा है तो कोई कोर्ट के इस निर्णय लेकर कानून व्यवस्था को सोशल मीडिया पर जिस तरीके लोग आक्रोशित हैं ऐसा महसूस हो रहा है अब न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास रहा ही नही तो कोई कोर्ट के इस निर्णय लेकर कानून व्यवस्था को इसी क्रम में
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कोर्ट के निर्णय पर कड़ा रुख अपनाया उन्होंने अपने फेसबुक पेज से सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि  “अभी-अभी एक अत्यधिक दु:खद खबर आई है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने किरण नेगी के साथ वीभत्स बलात्कार और उसकी हत्या के लिए जिम्मेदार अभियुक्तों को जिन्हें जिला न्यायालय और माननीय हाईकोर्ट ने सजा-ए-मौत दी थी उनको बरी कर दिया है? यह निर्भया हत्याकांड के तरीके से ही अत्यधिक वीभत्स हत्याकांड, मेडिकल रिपोर्ट, सारे साक्ष्य, कहाँ सरकार से चूक हुई कि जिन्हें फांसी पर झूलना चाहिए था, वो बरी हो गए! अत्यधिक अविश्वसनीय लगता है सब कुछ, खैर सुप्रीम आदेश है।”
दीपा नयाल देवपा जो कि भू कानून , उत्तराखण्ड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिये लगातार सक्रीय हैं!  उन्होंने उत्तराखण्ड की बेटी किरण नेगी के हत्यारों को कोर्ट के द्वारा  बरी किये गए निर्णय  पर कड़ा रुख अपनाया  साथ ही उन्होंने Being Uttarakhandi नामक फेसबुक पेज से लाइव आकर किरण नेगी   के परिजनों दुःख व बेटी को न्याय दिलाने में किये गए संघर्ष को बताया व भारत की न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट  से भी कई पोस्ट डाले जैसे
▪️”यहां सब बिकता है बस खरीददार अच्छा होना चाहिए”
किरण नेगी के क़ातिलो को बाइज़्ज़त बरी कर दिया है !!
▪️जिस तरह गैंगरेप के बाद उसकी आँखों और कान में तेजाब डाला पेचकस से आँखें फोड दी गुप्तांग में शराब की बोतल घुसा बोतल फ़ोड दी !
▪️बधाई हो किरण नेगी केस मे सब बरी हो गए वहा रे कानून
भारत फर्त्याल नामक यूजर देवभूमि डायलॉग न्यूज के खबर को  शेयर करते हुवे लिखते हैं
“न्यायालयों के उच्च पदों पर आसीन दलाल चाटुकार, जो चंद रुपयों के लिए शायद अपने घर की इज्जत भी नीलाम कर दें या फिर रुपयों की खातिर ऐसे दरिंदो को अपना दामाद बना लें.! 樂郎郎”
युवा कवि योगेश बहुगुणा योगी
जो कि उत्तराखण्ड के हर मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं उन्होंने भीकोर्ट के इस निर्णय का कड़ा विरोध किया फेसबुक पर कई पोस्ट डाले उनमें से एक पोस्ट हम आपको दिखा रहे हैं
“आज तक सिर्फ फिल्मों में देखा और सुना था कानून अंधा होता है और कानून के रखवाले बिकाऊ,
आज देख भी लिया। किरन नेगी के हत्यारे बाईज्जत बरी।”
मनोज तिवारी नामक यूजर जो
कि उत्तराखण्ड की बेटी अंकिता भण्डारी को न्याज दिलाने हेतु लगाकर सक्रिय हैं उन्होंने किरण नेगी के हत्यारों को बरी जाने के विरोध में एक से एक पोस्ट फेसबुक अकांउट से डाले
उनमें से एक ये है
“उत्तराखंड की बेटी किरन नेगी के अपराधियों की मौत की सजा सुप्रीम कोर्ट ने माफ कर दी. यह अपराधियों के हौसले बुलंद करने वाला फैसला है अब क्या अंकिता भंडारी को न्याय की उम्मीद है.??”
देवेन्द्र सिंह बिष्ट  नाम  के यूजर लीखते हैं किरण नेगी में हमे ऐसा न्याय मिला हैं तो आप समझ  सकते है अंकिता भण्डारी केस मैं क्या होने वाला है । इनके अलावा भी कई ऐसे उत्तराखंडी हैं जो कोर्ट के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं  हम दिखा नही पा रहे हैं !

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