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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मजाहिर खान ने खोला चीन और चीन के सहयोगी मुस्लिम देशों का काला चिट्ठा.

योगेश बहुगुणा(योगी)

ये खबर उस प्रस्ताव को लेकर है, जो  United Nations Human Rights Council में पेश हुआ था और इसमें चीन के Xinjiang (शिंजियांग) प्रांत में रहने वाले उइगर मुसलमानों का ज़िक्र किया गया था. दरअसल, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, डेनमार्क और फिनलैंड समेत कुल 9 देशों का ये कहना था कि चीन के इस प्रांत में उइगर मुसलमानों के मानव अधिकारों का ज़बरदस्त उल्लंघन हो रहा है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र की इस परिषद को इस पर बहस करानी चाहिए. लेकिन ये प्रस्ताव खारिज हो गया.
    भारत में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मदरसा प्रकोष्ठ मजाहिर खान का कहना है कि चीन में कई सालों से मुसलमानों के साथ हो रहे अत्याचार और उत्पीड़न को देखते हुए यूएन में जो बिल लाया गया था उसका गिरना बहुत अफसोस की बात है। बकौल मजाहिर खान यूएन में इस बिल को गिराने में मुसलमान देशों का हाथ है।
    दरअसल ये कहा जाता है कि चीन में मुसलमानों को ना नमाज पढ़ने की इजाजत है, ना टोपी पहनने की इजाजत है, ना दाढ़ी रखने की इजाजत है और ना ही चीन का मुसलमान हजयात्रा पर जा सकता है। चीन की सरकार मुसलमानों के ऊपर कई तरह का दबाव बना कर रखती है।
    मजाहिर खान कहते हैं कि जो बिल यूएन में लाया गया था वह 19 के मुक़ाबले 17 वोटों से गिरा दिया गया। इसे कुछ इस तरह समझा जा सकता है:- यूएन में कुछ देशों द्वारा ये बिल लाया गया था जिसमें चीन के उइगर मुसलमानों के मानवाधिकारों के हनन पर बहस होनी थी। इस बिल पर बहस होनी चाहिए या नहीं इसके लिए वोटिंग कराई गई जिसमें बिल पर बहस नहीं कराने के पक्ष में 19 वोट और कराने के पक्ष में 17 वोट पड़े। इस तरह यह बिल 19 के मुकाबले 17 वोट से गिर गया। भारत ने इस वोटिंग में भाग नहीं लिया।
    मजाहिर खान ने इस बिल के विपक्ष में वोट करने वाले देशों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि हैरत वाली बात है कि इस बिल के विरोध में 9 मुस्लिम देशों ने वोट दिया। उन्होंने कहा कि ये वो मुल्क हैं जो मुस्लिमों के हिमायती होने का ढोंग करते हैं। उन्होंने पाकिस्तान, इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों का नाम भी लिया।
    मजाहिर खान मुस्लिमों को सलाह देते हुए कहते हैं कि “हम हिंदुस्तान में जो सनातनी मुसलमान रह रहे हैं वो सबसे ज्यादा शुकूँन और इज्जत से रह रहे हैं। हमारे जो हमदर्द हैं वो हमारे देश के सनातनी हिंदू भाई हैं ना कि ये 56 या 57 मुस्लिम देश हैं। जो खुद को मुस्लिम-ओ-मालिक समझते हैं। उनके सामने ये आंखें खोलने वाली बात है।”
    उन्होंने कहा कि “उन 19 देशों में 9 मुसलमान देश थे वो अगर खामोश ही हो जाते और वोट नहीं करते तो तब भी वो बिल पास हो सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि उन मुस्लिम देशों ने अपना आका चीन को बना रखा है जो मुसलमानों के जबरदस्त दुश्मन है। उसी के पक्ष में उन्होंने वोट दिया। ये हिंदुस्तान के मुसलमानों के लिए आँख खोलने  के लिए बहुत बड़ी मिसाल है।”

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