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अल्मोड़ा जनपद के बजेला गाँव में स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक भास्कर जोशी बन रहे हैं मिसाल,कारण जानकर आप भी करेंगे सैल्यूट !

अल्मोड़ा(जागेश्वर)

यहाँ एक तरफ अधिकांश सरकारी स्कूलों अध्यापकों के आलसपन की वजह से लोग सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने नही भेजते है वहीं अध्यापक भास्कर जोशी मिसाल बन रहे हैं .अल्मोड़ा जनपद  के धौलादेवी ब्लॉक में अति दुर्गम क्षेत्र में स्थित  राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला के प्रधानाध्यापक भास्कर जोशी मिसाल बन रहे हैं . अध्यापक भास्कर जोशी की कठिन मेहनत व छोटे से प्रति लगाव देखकर आज हर पहाड़ी के मन एक बात जरूर आती होगी
“काश मेरे बच्चों को भी भास्कर जोशी जी जैसे अध्यापक पढ़ाते”
वर्ष 2020 में पहाड़ के एक स्कूल की वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रही थी जिसमें कुछ बच्चे अंग्रेजी बोल रहे थे . बाद मीडिया के माध्यम से पता चला कोई वो बच्चे कोई और नही बल्कि अल्मोड़ा जनपद के धौलादेवी ब्लॉक में अति दुर्गम क्षेत्र में स्थापित राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला के हैं । शिक्षक जोशी से साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया कि उनके छात्र ना सिर्फ अंग्रेजी बल्कि हिंदी संस्कृत और पहाड़ी भाषा में भी बहुत अच्छा वार्तालाप करते हैं उनके विद्यालय में प्रार्थना की शुरुआत ही 4 भाषाओं से होती है जिसमें बच्चे अंग्रेजी भाषा में हिंदी भाषा  संस्कृत भाषा और अपनी दूधबोली पहाड़ी में प्रार्थनाएं करते हैं।

कई नवाचारी गतिविधियां संचालित करते हैं

जोशी ने बताया कि वह विद्यालय समय उपरांत अपने गांव बजेला में बच्चों के अध्ययन के लिए ग्वाला कक्षाओं, बाल विज्ञान उद्यान ,शिक्षा का प्रसार नशे का तिरस्कार , अपने तीज त्योहार और संस्कृति को जोड़कर समुदाय और बच्चों को शिक्षा देना इत्यादि अन्य नवाचारों से शिक्षा प्रदान कर रहे हैं ।

एप्प और पोर्टल के माध्यम से देते हैं अन्य स्कूल के बच्चों को शिक्षा

अध्यापक भास्कर जोशी द्वारा एक app भी स्थापित किया गया है जिसमें  जो यहां के बच्चों एवं अभिभावकों के मध्य अत्यंत लोकप्रिय हो रहा है भास्कर जोशी से वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि यह एप उन्होंने कोरोना काल के दौरान विकसित किया था यह उनके विद्यालय में संचालित कई नवाचारी कार्यक्रमों में से एक है। इस एप्पलीकेशन ने बच्चो को पूरे कोरोना महामारी के दौरान शिक्षा से जोड़े रखा । जोशी ने बताया कि उनका यह एप किसी भी रूप में अन्य शैक्षिक एप के समान ही है साथ ही इस पर दी हुई तमाम शैक्षिक सामग्री निशुल्क है। एप के माध्यम से बच्चे एनसीईआरटी के ई-पाठशाला की सामग्री को अपने फोन में देख और पढ़ सकते जिस एप्प लिंक भी आपको इस खबर में दे दिया जाएगा इस एप्प के अलावा अध्यापक भास्कर जोशी ने वेबसाइट भी बनाई है इसके द्वारा के बच्चों को सरकार की तरफ से मिलने वाली योजनाओं   ,नौकरियों  , शिक्षा आदि संबंधित जानकारियां निःशुल्क देते रहते हैं !
शिक्षक जोशी ने बताया कि एक शिक्षक सिर्फ अपने विद्यालय तक सीमित शिक्षक नहीं होता है , शिक्षक का दायरा वृहत है इसी  उद्देश्य से learn.manaskedar.in नामक website पर वे पूरे भारत वर्ष के बच्चों के लिए निशुल्क शैक्षिक कोर्स(MOOC,s) बना रहे हैं जिससे हिंदुस्तान का कोई भी बच्चा या समुदाय लाभ ले सकें । विद्यालय सिर्फ चारदीवारी तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए ।

*पहाड़ों के पलायन को रोकने के लिये कारगार साबित  हो सकते हैं भास्कर जोशी जी जैसे अध्यापक*

पहाड़ में  कई ऐसे परिवार हैं जो  मात्र इस कारण पहाड़ छोड़ देते हैं क्योंकि उनके बच्चों को पढ़ाने के लिये वहाँ स्कूल तो हैं .मगर उस स्कूल में जो अध्यापक पढ़ाते हैं उन पर विश्वास नही होता है . शायद लोग इसी वजह से अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने के बजाय अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाते हैं . जिसके चलते उन्हें महंगी फीस , किताबों में लूट जैसी  घटनाओं  से शोषण का शिकार होना पड़ता है . पहाड़ हर स्कूल तो  प्राथमिक विद्यालय बजेला  जैसा स्कूल जरूर है मगर हर स्कूल में अध्यापक भास्कर जोशी जैसा बन जाएंगे तो हर कोई पढ़ाना चाहेगा सरकारी स्कूलों में
सरकार को भी एक कमेटी का गठन  ऐसे बुद्दिजीवी , मेहनती अध्यापकों की पहचान कर सम्मानित करना चाहिए .हो सकता है पहाड़ो में ऐसे एक नही हजारों भास्कर जोशी हो
सरकार से भी अनुरोध करना चाहेंगे सरकार  सरकारी अध्यापकों को आकर्षक वेतन देती है , सरकारी सुविधाएं देती है सम्मान देती है फिर भी लोग सरकारी स्कूलों के अपेक्षा निजी स्कूलों में ज्यादा विश्वास क्यों रखते हैं ? ऐसे ही हमारी हर अभिवाहक से विनती है अगर आपका बच्चा पढ़ाई में कमजोर होता है तो आप भी अध्यापकों से सवाल करें ये आपकी जिम्मेदारी है !

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